नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नीट पेपर लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर जारी विरोध-प्रदर्शन बुधवार को भी जारी रहा। प्रदर्शन के दौरान राजधानी के कई हिस्सों में तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। जंतर-मंतर से कनॉट प्लेस की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोक दिया, जिसके बाद कई स्थानों पर झड़प की घटनाएं सामने आईं। इस दौरान एक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) घायल हो गए, जबकि सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए लुटियंस दिल्ली में अगले आदेश तक इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। साथ ही दिल्ली मेट्रो के 16 प्रमुख स्टेशनों को भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रास्ते में रोका
बुधवार को जंतर-मंतर पर धरना दे रहे प्रदर्शनकारी कनॉट प्लेस की ओर मार्च निकालने लगे। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद टॉलस्टॉय मार्ग और जनपथ क्रॉसिंग के आसपास स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्रदर्शनकारी और पुलिस आमने-सामने आ गए, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, झड़प के दौरान कनॉट प्लेस के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) विवेक भगत घायल हो गए। उन्हें तत्काल डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने बताया कि हालात पर नियंत्रण पाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई।
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लुटियंस दिल्ली में बंद हुई इंटरनेट सेवा
प्रदर्शन के बीच प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से लुटियंस दिल्ली क्षेत्र में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अगले आदेश तक बंद करने का निर्णय लिया। प्रशासन का कहना है कि यह कदम अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को रोकने तथा सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
इसी दौरान सोशल मीडिया पर भी एक नया विवाद सामने आया। सीजेपी के नेताओं ने दावा किया कि पार्टी का आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था। पार्टी नेता अभिजीत दीपके ने इस घटना को लेकर केंद्र सरकार पर आरोप लगाए। हालांकि कुछ देर बाद इंस्टाग्राम अकाउंट दोबारा सक्रिय हो गया और सामान्य रूप से कार्य करने लगा।
फर्जी खबरों का दिल्ली पुलिस ने किया खंडन
दिल्ली पुलिस ने बताया कि विरोध-प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में भ्रामक और फर्जी पोस्ट प्रसारित किए गए। पुलिस की फैक्ट-चेक टीम ने अब तक कम से कम 15 वायरल दावों का खंडन किया है। इसके अलावा सैकड़ों वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट की जांच की जा रही है, ताकि गलत जानकारी फैलाने वालों की पहचान की जा सके।
इसी क्रम में सोशल मीडिया पर वायरल हुई यह खबर भी गलत पाई गई कि जंतर-मंतर पर ड्यूटी के दौरान एक पुलिसकर्मी की हार्ट अटैक से मौत हो गई। जांच में यह दावा पूरी तरह निराधार निकला।
दिल्ली हाईकोर्ट भी हुआ सक्रिय
प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े घटनाक्रम अब न्यायपालिका तक भी पहुंच गए हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने घटना से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज और वीडियो सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को निर्धारित की गई है।
सोनम वांगचुक को लेकर भी राजनीतिक हलचल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पर्यावरणविद और शिक्षाविद सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन भी चर्चा का विषय बना रहा। विपक्षी सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल पहुंचा और उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की। सांसदों ने 51 सांसदों के हस्ताक्षर वाला पत्र उनकी पत्नी को सौंपा और कहा कि देश को उनकी आवश्यकता है।
दूसरी ओर सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर कहा कि यदि सरकार यह स्पष्ट आश्वासन देती है कि आंदोलन में शामिल युवाओं के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तो वह अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे।
मेदांता अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन में बताया गया कि सोनम वांगचुक की स्थिति स्थिर है और डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम उनकी निगरानी कर रही है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
प्रदर्शन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी रहा। भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने विपक्ष पर छात्रों के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है और जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं वहां भी ऐसी घटनाएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और छात्रों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद और बांसुरी स्वराज ने भी सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि जब तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, दिल्ली पुलिस ने संयम बरता। उनका कहना था कि बिना अनुमति संसद की ओर मार्च किए जाने के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, सांसद इकरा हसन और जिया-उर-रहमान सहित कई विपक्षी नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया तथा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई।
कई एफआईआर दर्ज, सुरक्षा और कड़ी
दिल्ली पुलिस ने बताया कि संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा और उपद्रव के मामले में अलग-अलग थानों में कुल 10 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें पार्लियामेंट स्ट्रीट, कनॉट प्लेस, मंदिर मार्ग, बाराखंभा रोड और कर्तव्य पथ थाने शामिल हैं। पुलिस वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान कर रही है।
मेट्रो स्टेशन बंद, आम जनता प्रभावित
सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने राजीव चौक, जनपथ, केंद्रीय सचिवालय, पटेल चौक, मंडी हाउस, सुप्रीम कोर्ट, आईटीओ सहित 16 मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद रखने की घोषणा की। इससे हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
आंदोलन जारी, नजरें सरकार और प्रदर्शनकारियों पर
फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक कड़ी कर दी गई है। एक ओर सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कर रही है, वहीं प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत होती है या आंदोलन और तेज होता है, इस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।
