बरेली। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति केपी सिंह के विदाई समारोह में एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने वित्तिय अनियमितताओं पर जमकर हंगामा किया। एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने करीब एक साल पहले दर्ज पांच एफआईआर हटाने और कुलपति के कार्यकाल में हुई कथित अनियमितताओं पर कुलपति से जवाब मांगा। घटना रविवार को उस समय हुई जब ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल में कुलपति का विदाई समारोह चल रहा था। समारोह में एबीवीपी के कार्यकर्ताओं के आने के बाद स्थिति तनावपूर्ण बन गई।

बता दें कि रूहेलखंड विश्वविद्यालय में प्रो कृष्ण पाल सिंह का कार्यकाल 31 अगस्त को समाप्त हो रहा है। इसी क्रम में रुहेलखंड विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन ने कुलपति के लिए यह समारोह आयोजित किया था। एबीवीपी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी समारोह स्थल पर पहुंचे। उन्होंने कुलपति से भर्ती में अनियमितताओं, विश्वविद्यालय परिसर में पेड़ कटवाने और अन्य कथित घोटालों के बारे में सवाल किए। बहस जल्द ही हंगामे में बदल गई, जिससे माहौल गरमा गया।

देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि मौके पर मौजूद शिक्षकों और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक होने लगी। इसके बाद एबीवीपी के कार्यकर्ता नारेबाजी करने लगे। आरोप है कि इस दौरान कुलपति और कुछ शिक्षकों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई। स्थिति बिगड़ती देख शिक्षक कुलपति प्रो. कृष्ण पाल सिंह को ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल से बाहर लेकर आए। एबीवीपी पदाधिकारी मुकदमे वापस लेने की मांग पर अड़े रहे। कुछ देर तक चले हंगामे के बाद मामला शांत हुआ और विदाई समारोह दोबारा शुरू किया गया।
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चीफ प्रॉक्टर, सुरक्षा प्रभारी और शिक्षकों ने स्थिति को शांत करने का प्रयास किया। कुलपति सुरक्षा के बीच सभागार से बाहर जाने लगे। कार्यकर्ताओं ने पहले प्लेसमेंट सेल का दरवाजा बंद कर दिया। इसके बाद उन्होंने कुलपति की कार का दरवाजा बंद कर बाहर उनका घेराव किया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
जाने क्या थी कार्यकर्ताओं की मांगें
एबीवीपी के पूर्व पदाधिकारी श्रेयांश ने इस दौरान अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कुलपति ने अपने कार्यकाल में कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज कराई थी। श्रेयांश ने इन एफआईआर को तत्काल हटाने की मांग की। उन्होंने कुलपति से सभी कथित भ्रष्टाचारों का विस्तृत हिसाब देने को भी कहा, जिस पर कार्यकर्ताओं ने समर्थन जताया।
क्या है कुलपति का कहना
कुलपति कृष्ण पाल सिंह ने जवाब में कहा कि हर कार्यकाल में कुछ अच्छा और कुछ बुरा होता है। उन्होंने एफआईआर हटाने के लिए शपथ पत्र पर लिखकर देने का आश्वासन दिया। इस आश्वासन के बाद सभी लोग सभागार में वापस गए। वहां कुलपति को औपचारिक रूप से विदाई दी गई। अपने वक्तव्य में कुलपति ने कहा कि वह एबीवीपी कार्यकर्ताओं की इस विदाई को कभी नहीं भूलेंगे।
