बरेली। रक्षाबंधन के बहाने आयोजित एक बड़े कार्यक्रम ने बृहस्पतिवार को बरेली की सियासत के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। बरेली क्लब में महापौर उमेश गौतम और पार्थ गौतम फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में हजारों की भीड़ उमड़ने से अफरातफरी के हालात बन गए। बड़ी संख्या में महिलाओं के पहुंचने के बाद कार्यक्रम स्थल और आसपास की सड़कों पर जाम लग गया। धक्कामुक्की और भीड़ के दबाव के बीच कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ने की सूचना सामने आई। पुलिस को मौके पर पहुंचकर व्यवस्था संभालनी पड़ी।
सबसे गंभीर बात यह रही कि इसी दौरान एक महिला की मौत की सूचना भी तेजी से फैली। हालांकि, देर शाम तक पुलिस और प्रशासन ने मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी। ऐसे में मौत की सूचना की सत्यता, महिला की पहचान और कथित मौत के कारण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। लेकिन कार्यक्रम में पैदा हुई अव्यवस्था ने आयोजकों की भीड़ प्रबंधन व्यवस्था पर जरूर सवाल खड़े कर दिए।
चुनावी माहौल में बड़ा आयोजन, उठे राजनीतिक निहितार्थ पर सवाल
कार्यक्रम ऐसे समय आयोजित किया गया, जब प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की राजनीतिक तैयारियां धीरे-धीरे जोर पकड़ रही हैं। महापौर उमेश गौतम का यह आयोजन इसी वजह से राजनीतिक नजरिए से भी चर्चा में आ गया है। स्थानीय राजनीतिक हलकों में इसे महज रक्षाबंधन कार्यक्रम के बजाय जनसंपर्क और शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है।

हालांकि, यह स्पष्ट रूप से कहना कि कार्यक्रम चुनाव प्रचार के उद्देश्य से ही आयोजित किया गया था, आयोजकों या संबंधित प्राधिकारी के आधिकारिक बयान के बिना उचित नहीं होगा। लेकिन इस घटना के बाद पिछले करीब एक वर्ष से उमेश गौतम और उनके बेटे के राजनीतिक प्रचार-प्रसार से जुड़े कार्यक्रमों और गतिविधियों को लेकर चर्चाएं हो रही हैं। ऐसे में रक्षाबंधन के मौके पर बड़ी संख्या में महिलाओं को एकत्र कर किया गया आयोजन स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।

कार्यक्रम में महिलाओं को साड़ी वितरित किए जाने की बात सामने आई। बड़ी संख्या में महिलाओं को कार्यक्रम तक लाने के लिए बसों की व्यवस्था किए जाने की जानकारी भी सामने आई। लेकिन कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वापस लौटने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की शिकायत महिलाओं ने की। इससे आयोजन स्थल पर भीड़ और बढ़ती चली गई।
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बसों से लाईं गईं महिलाएं, लौटने की व्यवस्था पर सवाल
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं का आरोप था कि उन्हें कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाने के लिए बसों की व्यवस्था तो की गई, लेकिन कार्यक्रम समाप्त होने के बाद घर वापस भेजने की व्यवस्था उसी अनुपात में नहीं की गई। नतीजा यह रहा कि बड़ी संख्या में महिलाएं कार्यक्रम स्थल और उसके आसपास जमा रहीं।

भीड़ बढ़ने के साथ धक्कामुक्की की स्थिति पैदा हो गई। गर्मी और भीड़ के कारण कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिली। हालात इतने बिगड़े कि आसपास के थानों की पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा। पुलिसकर्मियों ने भीड़ को नियंत्रित करने के साथ यातायात व्यवस्था संभाली।
महिलाओं की बिगड़ी तबीयत
कार्यक्रम में करीब 40 वर्षीय रेखा भी साड़ी लेने पहुंची थीं। भीड़ और गर्मी के बीच उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें एंबुलेंस की मदद से अस्पताल भेजा गया। भीड़ गर्मी और उमस के चलते कई महिलाएं वेहाोश हो गई। जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। वहीं कई महिलाओं को कुछ देर में ही होश आ गया।
जिला अस्पताल के ईएमओ डॉ. शैलेश रंजन के अनुसार, एंबुलेंस में महिला बेहोश हुई थीं, लेकिन रास्ते में उन्हें होश आ गया। उनके साथ तीन अन्य महिलाएं और एक पार्टी के नेता भी अस्पताल पहुंचे थे।
चिकित्सक के मुताबिक धक्कामुक्की के दौरान महिला को गुम चोट लगने से दर्द की शिकायत थी। भीड़ और दमघुटने जैसी स्थिति के कारण उन्हें चक्कर भी आया। प्राथमिक उपचार और दवा देने के बाद महिला समेत अन्य लोग अस्पताल से चले गए।
मौत की सूचना ने बढ़ाई बेचैनी, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
इसी बीच कार्यक्रम में एक महिला की मौत होने की सूचना ने हड़कंप मचा दिया। यह सूचना तेजी से लोगों के बीच फैली, लेकिन देर शाम तक पुलिस और प्रशासन की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई थी। लिहाजा इस दावे को लेकर स्थिति अस्पष्ट बनी रही।
मौत की आधिकारिक पुष्टि न होने के कारण मृतका की पहचान और मौत के कारण को लेकर भी कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। प्रशासनिक जांच या आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में किसी महिला की मौत हुई या नहीं और यदि हुई तो उसका कारण क्या था।
पुलिस ने संभाली कमान, प्रशासन को कार्यक्रम की जानकारी तक नहीं
सीओ प्रथम आशुतोष शिवम के मुताबिक भीड़ अधिक होने की सूचना मिलने पर आसपास के थानों की पुलिस के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया गया। पुलिस ने भीड़ को व्यवस्थित करने के साथ यातायात को सुचारु कराया।
मामले का दूसरा गंभीर पहलू कार्यक्रम की अनुमति से जुड़ा है। सिटी मजिस्ट्रेट राजेश वर्मा के अनुसार प्रशासन को बरेली क्लब में इस कार्यक्रम के आयोजन की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि यदि कार्यक्रम स्मार्ट सिटी अथवा राइफल क्लब से संबंधित था तो उसकी अनुमति नगर निगम स्तर से दी जाती है।
आयोजन से ज्यादा अब व्यवस्था पर बहस
रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक और सामाजिक पर्व के नाम पर आयोजित कार्यक्रम में इतनी बड़ी भीड़ जुटने के बावजूद प्रवेश, निकासी, यातायात, चिकित्सा सहायता और वापसी की व्यवस्था पर सवाल उठना आयोजन की तैयारियों पर गंभीर टिप्पणी है।
एक तरफ कार्यक्रम को महिलाओं के सम्मान और रक्षाबंधन के उत्सव के रूप में प्रस्तुत किया गया, वहीं दूसरी तरफ आयोजन के बाद सामने आई भीड़ और अव्यवस्था ने सवाल खड़ा कर दिया कि क्या राजनीतिक जनसंपर्क और भीड़ जुटाने की होड़ में सुरक्षा इंतजाम पीछे छूट गए?
और यदि कार्यक्रम वास्तव में इतना बड़ा था तो प्रशासन को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी? आयोजकों ने भीड़ की संभावित संख्या का आकलन क्यों नहीं किया? महिलाओं को लाने के लिए बसें उपलब्ध थीं तो उन्हें वापस भेजने की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई? और सबसे बड़ा सवाल—यदि किसी महिला की मौत की सूचना सामने आई है तो इसकी सच्चाई क्या है? इन सवालों के जवाब अब आयोजकों और प्रशासन, दोनों से अपेक्षित हैं। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई से तत्काल स्थिति तो संभाल ली गई, लेकिन कार्यक्रम की व्यवस्थाओं और उसके राजनीतिक उद्देश्य को लेकर उठे सवालों का जवाब मिलना अभी बाकी है।
