इस वर्ष रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त को मनाया जाएगा। भाई-बहन के प्रेम और विश्वास से जुड़ा यह पर्व सभी के लिए खास होता है, लेकिन इस बार रक्षाबंधन की तिथि को लेकर एक खास ज्योतिषीय स्थिति बन रही है। रक्षाबंधन के दिन राहुकाल भी रहेगा, जिसे धार्मिक मान्यताओं में शुभ कार्यों के लिए उचित नहीं माना जाता।
इसके अतिरिक्त इसी दिन साल का अंतिम आंशिक चंद्र ग्रहण भी पड़ने वाला है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि राहुकाल के दौरान राखी बांधनी चाहिए या नहीं और चंद्र ग्रहण का रक्षाबंधन के पर्व पर कोई प्रभाव पड़ेगा या नहीं। आइए जानते हैं वैदिक ज्योतिष आश्रम के ज्योतिषाचार्य पंडित अभिनव भारद्वाज की राय और रक्षाबंधन पर राहुकाल व चंद्र ग्रहण से जुड़े जरूरी नियम।
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रक्षा बंधन के दिन राहुकाल का समय
पंडित अभिनव भारद्वाज ने बताया कि रक्षाबंधन के दिन राहुकाल प्रात: 10:31 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं में राहुकाल को शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए शुभ नहीं माना जाता। ऐसे में बहनों के लिए बेहतर रहेगा कि वे राहुकाल शुरू होने से पहले ही भाई की कलाई पर राखी बांध दें। इसके लिए सुबह 9:48 बजे से पहले राखी बांधना शुभ माना गया है।
चंद्र ग्रहण का रक्षाबंधन पर प्रभाव
पंडित अभिनव भारद्वाज ने कहा कि रक्षाबंधन पूर्णिमा को मनाया जाता है इस वर्ष रक्षाबंधन के दिन ही चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। हालांकि राहत की बात यह है कि यह आंशिक चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जिस स्थान पर ग्रहण नजर नहीं आता, वहां आमतौर पर सूतक और ग्रहण से संबंधित धार्मिक नियम लागू नहीं माने जाते। इसलिए भारत में रहने वाले लोगों के लिए रक्षाबंधन के पर्व पर ग्रहण को लेकर विशेष चिंता करने की जरूरत नहीं है। बहनें सामान्य रूप से भाई को राखी बांध सकती हैं।
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए दो शुभ समय बताए गए हैं। पहला और सबसे बेहतर मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक रहेगा। इस दौरान राखी बांधना शुभ और फलदायी माना गया है। अगर किसी कारण से सुबह राखी नहीं बांध पाएं, तो दोपहर 12:14 बजे से 1:05 बजे तक अभिजीत मुहूर्त भी विकल्प के तौर पर मौजूद रहेगा। हालांकि सुबह के शुभ समय में ही राखी बांधना अधिक उचित रहेगा, क्योंकि दोपहर के आसपास राहुकाल का समय पड़ रहा है। इसलिए बहनों के लिए सुबह का मुहूर्त सबसे सुविधाजनक और शुभ विकल्प माना जा रहा है।
नोट: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए दुर्ग दृष्टि टाइम्स उत्तरदायी नहीं है।
