• August 21, 2026
  • Last Update August 11, 2026 1:14 am
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NTA में बड़े बदलाव की तैयारी

NTA में बड़े बदलाव की तैयारी: नंदन नीलेकणि की अगुवाई में छह सदस्यीय हाई-पावर टास्क फोर्स करेगी परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर उठे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नीट-यूजी सहित कई राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बाद सरकार ने छह विशेषज्ञों की एक हाई-पावर टास्क फोर्स का गठन किया है। इस समिति का उद्देश्य भविष्य में होने वाली सभी राष्ट्रीय परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और भरोसेमंद बनाना है।

इस उच्चस्तरीय समिति की कमान देश के प्रसिद्ध तकनीकी विशेषज्ञ और इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि को सौंपी गई है। उनके साथ विज्ञान, शिक्षा, साइबर सुरक्षा, खुफिया तंत्र और प्रशासन के क्षेत्र के पांच अनुभवी विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है। सरकार का मानना है कि इन विशेषज्ञों का अनुभव एनटीए की परीक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधार लागू करने और भविष्य में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना को न्यूनतम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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परीक्षा प्रणाली की होगी व्यापक समीक्षा

सरकार ने इस टास्क फोर्स को एनटीए की वर्तमान परीक्षा व्यवस्था की पूरी समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी है। समिति परीक्षा आयोजित करने की प्रत्येक प्रक्रिया का विश्लेषण करेगी और यह सुझाव देगी कि किस प्रकार आधुनिक तकनीक, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और बेहतर प्रशासनिक तंत्र के माध्यम से परीक्षाओं को अधिक निष्पक्ष बनाया जा सकता है।

समिति प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उनकी सुरक्षित छपाई, परिवहन, भंडारण और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया की जांच करेगी। साथ ही परीक्षा केंद्रों पर निगरानी व्यवस्था, उम्मीदवारों की पहचान, डिजिटल सुरक्षा, साइबर हमलों से बचाव और परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाओं तथा परिणाम प्रक्रिया को भी अधिक सुरक्षित बनाने के उपाय सुझाएगी।

इसके अतिरिक्त, यह समिति साइबर सुरक्षा को मजबूत करने, परीक्षा संचालन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और आधुनिक डिजिटल तकनीकों के उपयोग, डेटा सुरक्षा तथा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्रकार की परीक्षाओं को सुरक्षित बनाने के लिए विस्तृत सिफारिशें तैयार करेगी।

कौन हैं समिति के अध्यक्ष नंदन नीलेकणि?

समिति का नेतृत्व कर रहे नंदन नीलेकणि भारत के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी विशेषज्ञों में गिने जाते हैं। वे आईटी कंपनी इंफोसिस के सह-संस्थापक हैं और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के पहले अध्यक्ष रह चुके हैं। आधार जैसी दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान परियोजना को सफलतापूर्वक लागू करने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है। बड़े पैमाने पर डिजिटल सिस्टम विकसित करने और सरकारी सेवाओं को तकनीक से जोड़ने का उनका अनुभव एनटीए की परीक्षा प्रणाली के डिजिटलीकरण और सुरक्षा को नई दिशा दे सकता है।

समिति के अन्य प्रमुख सदस्य

एस. सोमनाथ : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने चंद्रयान-3 मिशन की ऐतिहासिक सफलता हासिल की। जटिल वैज्ञानिक परियोजनाओं के कुशल प्रबंधन और उच्च स्तर की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का उनका अनुभव परीक्षा प्रणाली के प्रभावी संचालन में उपयोगी माना जा रहा है।

तपन डेका : देश के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों में शामिल रहे हैं और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के पूर्व निदेशक हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा, गोपनीय सूचनाओं की सुरक्षा और संवेदनशील अभियानों के संचालन का उनका अनुभव प्रश्नपत्रों की गोपनीयता तथा परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

प्रो. वी. कामकोटि: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के निदेशक हैं। वे कंप्यूटर विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे आधुनिक तकनीकी समाधान तैयार करने में अहम योगदान देंगे, जिससे ऑनलाइन और कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं की सुरक्षा और अधिक मजबूत हो सके।

अनीता करवाल: भारत सरकार में शिक्षा सचिव रह चुकी हैं। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, स्कूल शिक्षा सुधार और कई महत्वपूर्ण शैक्षिक योजनाओं में प्रमुख भूमिका निभाई है। शिक्षा प्रशासन का उनका व्यापक अनुभव परीक्षा प्रणाली में नीतिगत सुधार और संस्थागत जवाबदेही बढ़ाने में सहायक होगा।

अमृत लाल मीणा: वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं और प्रशासनिक प्रबंधन तथा बड़े स्तर पर सरकारी व्यवस्थाओं के संचालन का लंबा अनुभव रखते हैं। परीक्षा केंद्रों के चयन, लॉजिस्टिक्स, प्रश्नपत्रों की सुरक्षित आवाजाही और परीक्षा संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने में उनकी विशेषज्ञता महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

क्यों महसूस हुई नई समिति की जरूरत?

पिछले कुछ वर्षों में नीट-यूजी समेत कई राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, फर्जी अभ्यर्थियों, तकनीकी खामियों और परीक्षा संचालन में अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। इन घटनाओं ने लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

इन विवादों के कारण छात्रों ने देशभर में विरोध प्रदर्शन किए और कई मामलों में न्यायालयों तक का दरवाजा खटखटाया गया। इसके बाद सरकार पर परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने का दबाव बढ़ा।

छात्रों का भरोसा दोबारा जीतने की कोशिश

केंद्र सरकार का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं केवल चयन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं के भविष्य का आधार होती हैं। इसलिए परीक्षा प्रणाली का निष्पक्ष और सुरक्षित होना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से गठित यह हाई-पावर टास्क फोर्स भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसी सिफारिशें तैयार करेगी, जिनसे पेपर लीक, साइबर हमले, तकनीकी गड़बड़ियों और प्रशासनिक कमजोरियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समिति की सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो एनटीए की परीक्षा प्रणाली पहले की तुलना में अधिक आधुनिक, पारदर्शी और विश्वसनीय बन सकती है। इससे न केवल छात्रों और अभिभावकों का भरोसा मजबूत होगा, बल्कि देश की प्रतियोगी परीक्षाओं की साख भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी।

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