El Nino: सावधान आने वाला है अल नीनो, वैज्ञानिकों ने जारी किया मौसम में महाविनाश का अलर्ट

El Nino: सावधान आने वाला है अल नीनो, वैज्ञानिकों ने जारी किया मौसम में महाविनाश का अलर्ट

अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) ने आधिकारिक रूप से एलान कर दिया है कि अल नीनो विकसित हो चुका है और इसकी शुरुआत हो चुकी है। वैज्ञानिकों ने संभावना व्यक्त की है कि आने वाले महीनों में यह और ज्यादा मजबूत होगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह जलवायु घटना 2026-27 की उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों तक मध्यम से मजबूत स्तर तक पहुंच सकती है।

क्या है अल नीनो

अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु की घटना है जो हर दो से सात वर्ष में होती है। परंतु इसका प्रभाव पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है। अन्य शब्दों में इसे इस प्रकार भी कहा जा सकता है कि जब भी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है तभी अल नीनो बनता है।

NOAA के जलवायु विशेषज्ञों ने बताया है कि अल नीनो के इसकी तीव्रता पर निर्भर करेंगे। इसके कारण कुछ इलाकों में ज्यादा बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है, तो वहीं कुछ हिस्सों में सूखा और तेज गर्मी ला सकता है। जलवायु परिवर्तन इन प्रभावों को और बढ़ा या बदल सकता है।

वैज्ञानिकों ने संभावना जताई है कि इस वर्ष अल नीनो आने वाले समय में और भी ज्यादा मजबूत हो सकता है। वैज्ञानिकों ने संकेत दिया था कि इस वर्ष इसके सर्दियों तक मजबूत स्तर तक पहुंचने की ज्यादा संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो से वैश्विक औसत तापमान बढ़ सकता है। इसके साथ ही रिकॉर्ड गर्म वर्षों की संभावना बढ़ती है। इसका कृषि, जल संसाधनों, समुद्री पारिस्थितिक तंत्र और मौसम संबंधी आपदाओं पर प्रभाव पड़ सकता है।

यह भी पढ़ें: El Nino: अल नीनो से कौन कौन से देश होंगे प्रभावित, जानें सबसे ज्यादा कहां होगी बर्बादी?

जाने कैसे होती है अल नीनो की शुरुआत?

भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के ऊपर पश्चिमी हवाओं के चलने से अल नीनो की शुरुआत होती है। यह हवाएं समुद्र की सतह के गर्म पानी को पूर्व की तरफ ले जाती हैं। इससे पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत इलाके में गर्म पानी का एक बड़ा भंडार बन जाता है। इस गर्म पानी से उसके ऊपर की हवा भी गर्म होती है।

इसका परिणाम यह होता है कि वैश्विक वायुमंडल में मौसम प्रणालियां फिर से बनने लगती हैं और दुनिया भर के मौसम पैटर्न को प्रभावित करती हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि यह 1950 से रिकॉर्ड रखे जाने के बाद की सबसे शक्तिशाली या सबसे शक्तिशाली अल नीनो घटनाओं में से एक सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *