भारत में पेपर लीक होने का सिलसिला रूकने का नाम ही नहीं ले रहा है। नीट के बाद भाजपा शासित गुजरात में बीएएमएस परीक्षा का पेपर लीक होने का बड़ा मामला सामने आया है। ताजा मामला जामनगर स्थित गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी में बीएएमएस परीक्षा का पर्चा लीक होने का आरोप लगा है। पेपर लीक होने का मामला सामने आने के बाद से छात्रों में भारी आक्रोश है। अब इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार और भाजपा पर सीधा हमला बोला है।
पेपर लीक पर संजय सिंह ने भाजपा पर लगाए आरोप
इस मामले में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि देश भर में लगातार पेपर लीक हो रहे हैं। इसमें भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिलीभगत है। सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि जहां-जहां भाजपा की सरकारें हैं, वहां पेपर लीक होना आम बात बन गई है। उन्होंने दावा किया कि घोटाले में शामिल कंपनियों के तार सत्ता से जुड़े हैं। ये कंपनियां पीएम मोदी और भाजपा के मुख्यमंत्रियों के करीबी हैं। इसी वजह से पेपर लीक करने वाले माफियाओं पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती है।
क्या है पूरा मामला
संजय सिंह ने गुजरात के इस नए मामले की पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी में बीएएमएस की परीक्षाएं चल रही हैं। बीएएमएस का मतलब बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी होता है। आप सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि यहां 20 जुलाई को बीएएमएस थर्ड ईयर के ‘शल्य तंत्र-1’ विषय का पेपर था। आरोप है कि परीक्षा से ठीक पहले ही इसके सवाल व्हाट्सएप पर वायरल हो गए। परीक्षा में कुल 12 सवाल पूछे गए थे। इनमें से 11 सवाल वही थे, जो व्हाट्सएप पर पहले ही शेयर हो चुके थे। संजय सिंह ने डर जताया कि ये परीक्षाएं दो अगस्त तक चलेंगी। तब तक और कितने पेपर लीक होंगे, कुछ कहा नहीं जा सकता।
पेपर लीक पर क्या है यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना?
पेपर लीक का विवाद बढ़ते ही यूनिवर्सिटी प्रशासन में हड़कंप मच गया। इंचार्ज एग्जामिनेशन डायरेक्टर एचपी झाला ने इस पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई की सुबह परीक्षा शांति से पूरी हो गई थी। लेकिन शाम को मोबाइल पर सवाल वायरल होने की सूचना मिली। इसके बाद वाइस चांसलर से बात की गई। मामले की जांच के लिए तुरंत एक विशेष जांच समिति बना दी गई है। यूनिवर्सिटी ने कहा कि अभी पेपर लीक की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम फैसला होगा। अगर कोई दोषी पाया गया, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल 20 से 25 कॉलेजों की बाकी परीक्षाएं रद्द नहीं की गई हैं। वे अपने तय समय पर ही होंगी।
जयराम रमेश: पेपर लीक का केंद्र बन गया है गुजरात
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। 2014 से 2024 के बीच गुजरात में 34 पेपर लीक हुए हैं। 2014 में जीपीएससी चीफ ऑफिसर का पेपर, 2015 और 2016 में तलाटी का पेपर, 2018 में टीएटी-टीचर पेपर, मुख्य सेविका पेपर, नायब चिटनिस पेपर और लोक रक्षक दल का पेपर, 2019 में नॉन-सेक्रेटेरिएट क्लर्क परीक्षा, 2021 में हेड क्लर्क, डीजीवीसीएल विद्युत असिस्टेंट और सब-ऑडिटर परीक्षाएं, 2022 में फॉरेस्ट गार्ड परीक्षा और 2023 में जूनियर क्लर्क परीक्षा। ये सभी पेपर लीक हुए।
उन्होंने यह भी कहा कि 2024 में यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा का चर्चित लीक भी अहमदाबाद से ही करवाया गया था। भाजपा के शासन में गुजरात भारत में सभी पेपर लीक का केंद्र बन गया है। मोदी सरकार की फास्ट-ट्रैक अदालतें इस सिस्टम से जुड़ी समस्या का समाधान नहीं हैं। यह ध्यान भटकाने का एक तरीका है। हमें इस बात पर एक बड़ी और ईमानदार बातचीत की जरूरत है कि अपनी परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था में सुधार कैसे किया जाए।
