बरेली। प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने बुधवार को राष्ट्रीय पशुरोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनएडीसीपी) के अंतर्गत खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) रोग के आठवें चरण के टीकाकरण अभियान 2026-27 का शुभारंभ किया। विकास भवन परिसर से उन्होंने टीकाकरण टीमों को हरी झंडी दिखाकर अभियान के लिए रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान को पूरी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाए, ताकि जिले का कोई भी पशु टीकाकरण से वंचित न रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री धर्मपाल सिंह ने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया कि अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, टीवी, रेडियो, समाचार पत्र, सोशल मीडिया तथा पोस्टरों के माध्यम से पशुपालकों को जागरूक किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग अपने पशुओं का टीकाकरण कराएं। उन्होंने कहा कि खुरपका-मुंहपका रोग पशुधन के लिए गंभीर बीमारी है, जिससे बचाव का सबसे प्रभावी उपाय समय पर टीकाकरण ही है।
बैठक में अपर निदेशक पशुपालन विभाग ने अभियान की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि जनपद बरेली के सभी 15 विकास खंडों की 1,188 ग्राम पंचायतों में टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए शासन स्तर से 5,84,550 एफएमडी वैक्सीन उपलब्ध कराई गई हैं। अभियान को निर्धारित 45 दिनों में पूरा करने के लिए जिले में 53 टीकाकरण टीमों का गठन किया गया है।
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इन टीमों में कुल 277 पैरावेट एवं पशु मित्र, 46 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, 24 पशुधन प्रसार अधिकारी, 22 पशु चिकित्सा अधिकारी तथा 6 उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी लगाए गए हैं। सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित माइक्रो प्लान के अनुसार प्रत्येक गांव में समय से पहुंचकर शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करें।

इसके बाद विकास भवन सभागार में रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र, पशुपालन विभाग उत्तर प्रदेश की निदेशक डॉ. संगीता तिवारी की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में उन्होंने अभियान के सफल संचालन के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि टीकाकरण अभियान पूर्व निर्धारित माइक्रो प्लान के अनुरूप ही संचालित किया जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए।
डॉ. संगीता तिवारी ने अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देश दिया कि एफएमडी वैक्सीन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कोल्ड-चेन व्यवस्था का पूरी तरह पालन किया जाए। उन्होंने कहा कि वैक्सीन को 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच सुरक्षित रखा जाए, क्योंकि तापमान में गड़बड़ी होने से वैक्सीन की प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि टीकाकरण के दौरान प्रत्येक पशु की टैगिंग अनिवार्य रूप से की जाए और टीकाकरण से संबंधित समस्त विवरण उसी दिन भारत पशुधन ऐप पर शत-प्रतिशत दर्ज किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिजिटल डेटा अपलोड में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी, क्योंकि इससे अभियान की निगरानी और मूल्यांकन प्रभावित हो सकता है।
बैठक में अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया कि एफएमडी टीकाकरण के लिए आवश्यक प्री एवं पोस्ट सीरम सैंपल समय से मंडलीय प्रयोगशाला, बरेली भेजे जाएं, ताकि उन्हें उच्च स्तरीय जांच के लिए निर्धारित समय पर अग्रेषित किया जा सके। इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थित गो-आश्रय स्थलों में रह रहे गोवंशों की स्वास्थ्य संबंधी सतत निगरानी रखने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल उपचार एवं टीकाकरण सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।
कार्यक्रम में रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र, पशुपालन विभाग उत्तर प्रदेश की निदेशक डॉ. संगीता तिवारी, अपर निदेशक ग्रेड-2 पशुपालन विभाग बरेली मंडल डॉ. मदन पाल सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनमोहन पांडेय, नोडल अधिकारी एवं उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी सदर डॉ. ओ.पी. वर्मा सहित जिले के सभी उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, पशु चिकित्सा अधिकारी, पशुधन प्रसार अधिकारी, पैरावेट, पशु मित्र, वैक्सीनेटर तथा अन्य विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय पशुरोग नियंत्रण अभियान के माध्यम से जिले में पशुओं को खुरपका-मुंहपका जैसी संक्रामक बीमारी से सुरक्षित रखने के साथ-साथ पशुपालकों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
