बरेली। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर को आधुनिक और बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच सोमवार को बरेली में हुई दो घटनाओं ने इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। महज पांच घंटे के अंतराल में शहर की दो प्रमुख सड़कें अचानक धंस गईं। पहली घटना सुबह बरेली कॉलेज के पश्चिमी गेट के पास हुई, जबकि दूसरी घटना दोपहर बाद पोस्टमार्टम रोड पर मिशन अस्पताल के सामने सामने आई। दोनों घटनाओं से राहगीरों, वाहन चालकों और स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। हालांकि समय रहते लोगों की सतर्कता के कारण कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।
बरेली कॉलेज के पास अचानक धंसी सड़क, बाल–बाल बचे छात्र
सोमवार सुबह करीब 10 बजे बरेली कॉलेज के पश्चिमी गेट के समीप सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया। उस समय कॉलेज में छात्रों की आवाजाही जारी थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ छात्र गड्ढे के बेहद करीब पहुंच गए थे, लेकिन समय रहते संभल जाने के कारण वे दुर्घटना का शिकार होने से बच गए। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और लोगों ने तुरंत नगर निगम को सूचना दी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्थान पर पहले भी सड़क धंसने की घटनाएं हो चुकी हैं। हर बार अस्थायी मरम्मत कर समस्या को टाल दिया जाता है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यही कारण है कि यह समस्या बार-बार सामने आ रही है।
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मरम्मत चल रही थी, तभी पोस्टमार्टम रोड पर भी धंस गई सड़क
नगर निगम की टीम बरेली कॉलेज के पास मरम्मत कार्य में जुटी ही थी कि दोपहर बाद शहर के पोस्टमार्टम रोड पर मिशन अस्पताल के मुख्य गेट के सामने भी सड़क धंस गई। कुछ ही देर में सड़क पर बड़ा गड्ढा बन गया, जिससे अस्पताल आने वाले मरीजों, तीमारदारों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
घटना के बाद प्रारंभिक स्तर पर गड्ढे के चारों ओर केवल लकड़ियां रखकर लोगों को सतर्क करने का प्रयास किया गया। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना था कि इतनी व्यस्त सड़क पर केवल लकड़ियां रख देना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। यहां तत्काल मजबूत बैरिकेडिंग और यातायात नियंत्रण की आवश्यकता थी।
यातायात प्रभावित, लोगों में बढ़ी चिंता
दोनों स्थानों पर सड़क धंसने की घटनाओं के बाद यातायात प्रभावित हुआ। वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा, जिससे आसपास के इलाकों में जाम जैसी स्थिति भी बनी। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर सड़क की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए स्मार्ट सिटी परियोजना की गुणवत्ता पर सवाल उठाए।
नागरिकों का कहना है कि शहर की प्रमुख सड़कों की यह स्थिति चिंता का विषय है। यदि समय रहते इन गड्ढों की जानकारी न मिलती तो कोई बड़ा हादसा भी हो सकता था।
सीवर लाइन चोक होने को माना जा रहा मुख्य कारण
प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि दोनों स्थानों पर सीवर लाइन चोक होने और उसके आसपास की मिट्टी के लगातार कटाव के कारण सड़क के नीचे खाली स्थान बन गया। इसी वजह से सड़क का ऊपरी हिस्सा अचानक धंस गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सीवर लाइनों की नियमित सफाई, निरीक्षण और समय पर मरम्मत नहीं की जाती, तो इस प्रकार की घटनाएं बार-बार सामने आती रहेंगी। बरसात के मौसम में मिट्टी का कटाव बढ़ने से जोखिम और अधिक बढ़ जाता है।
नगर निगम और स्मार्ट सिटी अधिकारियों ने संभाला मोर्चा
सूचना मिलते ही नगर निगम के जलकल विभाग, निर्माण विभाग तथा स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारी दोनों स्थानों पर पहुंच गए। सबसे पहले प्रभावित क्षेत्रों में बैरिकेडिंग कर यातायात को सुरक्षित दिशा में मोड़ा गया। इसके बाद सड़क की खुदाई कर क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत शुरू कराई गई। अधिकारियों ने सड़क के नीचे की स्थिति का भी निरीक्षण किया ताकि वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
नगर आयुक्त बोले— होगी तकनीकी जांच
नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि दोनों स्थानों पर मरम्मत कार्य युद्ध स्तर पर कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सड़क धंसने के वास्तविक कारणों की विस्तृत तकनीकी जांच कराई जाएगी। यदि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही या तकनीकी खामी सामने आती है, तो संबंधित एजेंसियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रभावित मार्गों को जल्द से जल्द सुरक्षित बनाकर यातायात के लिए पूरी तरह बहाल किया जाएगा।
स्थायी समाधान की उठी मांग
लगातार सामने आ रही सड़क धंसने की घटनाओं के बाद शहरवासियों ने स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत हुए निर्माण कार्यों का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल गड्ढे भरने से समस्या का समाधान नहीं होगा। आवश्यक है कि पूरे सीवर नेटवर्क, भूमिगत संरचनाओं और सड़क निर्माण की गुणवत्ता की व्यापक जांच कराई जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
बड़ा सवाल
स्मार्ट सिटी का उद्देश्य शहर को सुरक्षित, आधुनिक और टिकाऊ आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में एक ही दिन में दो प्रमुख सड़कों का धंस जाना यह संकेत देता है कि केवल विकास कार्यों का उद्घाटन पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी गुणवत्ता, नियमित निगरानी और समय पर रखरखाव भी उतना ही आवश्यक है। अब शहरवासियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस घटना से क्या सबक लेता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन से ठोस कदम उठाता है।
