• October 5, 2026
  • Last Update August 31, 2026 1:57 am
  • Bareilly
डीएम कार्यालय के बाहर आत्मदहा का किया प्रयास

डीएम कार्यालय के बाहर परिवार के साथ आत्मदाह का प्रयास, इंटेलिजेंस व एलआईयू की सतर्कता से टला बड़ा हादसा

बरेली। कलेक्ट्रेट परिसर में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब मीरगंज थाना क्षेत्र के ग्राम खमरिया सानी निवासी 47 वर्षीय लाल सिंह गंगवार अपनी पत्नी राजरानी और आठ वर्षीय बेटी नंदनी के साथ डीएम कार्यालय के बाहर आत्मदाह करने पहुंच गए। परिवार ने अपने ऊपर ज्वलनशील पदार्थ डाल लिया था, लेकिन मौके पर तैनात इंटेलिजेंस और एलआईयू टीम की तत्परता से बड़ा हादसा टल गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही लाल सिंह और उनके परिवार को पेट्रोल डालते हुए देखा गया, इंटेलिजेंस के ओमपाल सिंह, एलआईयू के अमित कुमार तथा होमगार्ड संदीप मिश्रा तुरंत उनकी ओर दौड़े और उन्हें काबू में लेकर आग लगाने से रोक दिया। राहगीरो का कहना है कि कुछ सेकंड की भी देरी होती तो कलेक्ट्रेट परिसर के पास गंभीर हादसा हो सकता था।

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घटना के बाद तीनों को गोपनीय कार्यालय ले जाकर पूछताछ की गई और फिर मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल भेजा गया।

 लाल सिंह ने आरोप लगाया कि गांव में उनके घर तक जाने वाले सरकारी रास्ते पर कब्जा कर आवागमन बाधित कर दिया गया है। इस संबंध में कई बार प्रशासनिक और राजस्व अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद समाधान न होने से वे परेशान थे।

जानकारी के अनुसार, खमरिया सानी गांव में सरकारी खड़ंजा मार्ग को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। राजस्व विभाग की अलग-अलग जांच रिपोर्टों में रास्ते की स्थिति को लेकर भिन्न निष्कर्ष सामने आए हैं। पूरा मामला यह है कि मीरगंज तहसील स्थित ग्राम खमरिया सानी में सरकारी खड़ंजा मार्ग को लेकर विवाद गहरा गया है।

लाल सिंह और सुंदर लाल ने आरोप लगाया कि चन्द्रपाल व होमगार्ड रामप्रकाश को एसडीएम मीरगंज के यहां तैनात है ने मंडनपुर रोड से जुड़ने वाले सरकारी रास्ते पर वाहन खड़े कर, पशु बांधकर और लकड़ी रखकर आवागमन बाधित कर दिया है। राजस्व टीम की स्थलीय जांच में मौके पर अस्थायी कब्जा मिलने की बात सामने आई, जबकि विपक्ष ने संबंधित भूमि को 1959 के बैनामे से खरीदी गई निजी संपत्ति बताया।

जांच के दौरान चन्द्रपाल और रामप्रकाश मौके पर उपस्थित नहीं हुए। अधिकारियों ने बताया कि 1959 के बाद 1986 में चकबंदी हो चुकी है, इसलिए पुराने बैनामे की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। रिपोर्ट में उल्लेख है कि रास्ते को लेकर गांव में तनाव बना हुआ है और पुलिस बल की मौजूदगी में ही विवाद का समाधान संभव है। इससे पहले वर्ष 2023 में दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया था तथा 2025 में रास्ते से अतिक्रमण भी हटवाया गया था।

वहीं, राजस्व विभाग की दूसरी जांच में मामले को आबादी भूमि का विवाद बताते हुए कहा गया कि मानचित्र में रास्ता दर्ज नहीं है और शिकायतकर्ता के पास वैकल्पिक निकास उपलब्ध है।पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। कोतवाली इंस्पेक्टर राजीव चौधरी ने बताया कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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