लखनऊ। उत्तर प्रदेश के दो सबसे महत्वपूर्ण शहरों लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा करने वाले लाखों लोगों के लिए 14 जुलाई से सफर पहले से कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगा। लगभग 4,200 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। इस हाई-स्पीड कॉरिडोर के शुरू होने से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय घटकर महज 35 से 45 मिनट रह जाएगा।
इस आधुनिक छह-लेन एक्सप्रेसवे का लोकार्पण सोमवार को उन्नाव जिले के झाऊखेड़ा में आयोजित समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

लोकार्पण से पहले तकनीकी प्रदर्शनी का किया अवलोकन
लोकार्पण कार्यक्रम से पहले अतिथियों ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा आयोजित तकनीकी प्रदर्शनी का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने एक्सप्रेसवे के निर्माण में अपनाई गई आधुनिक 3डी इंफ्रास्ट्रक्चर तकनीक, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों तथा भविष्य में विस्तार की योजनाओं की जानकारी दी।
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मंगलवार से शुरू होगी टोल वसूली
14 जुलाई की सुबह से एक्सप्रेसवे पर वाहनों का नियमित संचालन शुरू होने के साथ ही टोल टैक्स की वसूली भी लागू हो जाएगी। चूंकि यह कंट्रोल्ड-एक्सेस हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे है, इसलिए सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई सख्त नियम भी लागू किए गए हैं।
इस मार्ग पर केवल कार, जीप, बस, ट्रक और अन्य मोटर चालित भारी वाहनों को ही चलने की अनुमति होगी। वहीं बाइक, स्कूटर, ऑटो, विक्रम, ई-रिक्शा, साइकिल, ट्रैक्टर, पशु चालित वाहन तथा अन्य धीमी गति वाले वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।

35 से 45 मिनट में पूरा होगा सफर
अब तक लखनऊ और कानपुर के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर भारी ट्रैफिक, चौराहों और स्थानीय यातायात के कारण लोगों को करीब डेढ़ से दो घंटे तक का समय लगता था। नए एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद यह दूरी मात्र 35 से 45 मिनट में पूरी की जा सकेगी।
इससे न केवल यात्रियों का समय बचेगा, बल्कि ईंधन की खपत भी कम होगी। साथ ही एनएच-27 पर वाहनों का दबाव घटने से उन्नाव और आसपास के क्षेत्रों में लगने वाले जाम से भी काफी राहत मिलने की उम्मीद है।

उन्नाव को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ
इस परियोजना का सबसे अधिक लाभ उन्नाव जिले को मिलने वाला है। एक्सप्रेसवे को कानपुर-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग के अलावा उन्नाव-लालगंज मार्ग से भी जोड़ा गया है।
बेहतर कनेक्टिविटी के लिए बनी, गंगाघाट, करेर पतारी, कोरारी और अमरसस के पास आधुनिक इंटरचेंज विकसित किए गए हैं। इनके माध्यम से उन्नाव, रायबरेली, कानपुर और लखनऊ के बीच आवागमन पहले की तुलना में अधिक आसान और तेज होगा।
उद्योग और व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार
यह एक्सप्रेसवे क्षेत्र के औद्योगिक और व्यावसायिक विकास को भी गति देगा। कानपुर के चमड़ा, वस्त्र और अन्य उद्योगों को लखनऊ के प्रशासनिक एवं आईटी केंद्र से तेज संपर्क मिलेगा। इससे माल ढुलाई का समय और लागत दोनों कम होंगे, जिससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क के कारण नए निवेश आकर्षित होंगे और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। वहीं शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और नौकरी के लिए प्रतिदिन आने-जाने वाले हजारों लोगों को समय और ईंधन दोनों की बचत होगी।
एक्सप्रेसवे की प्रमुख विशेषताएं
- लंबाई: 63 किलोमीटर का छह-लेन हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे।
- लागत: लगभग 4,200 करोड़ रुपये।
- यात्रा समय: लखनऊ से कानपुर सिर्फ 35-45 मिनट।
- बेहतर कनेक्टिविटी: उन्नाव, रायबरेली, कानपुर और लखनऊ को आधुनिक इंटरचेंज से जोड़ा गया।
- सुरक्षा व्यवस्था: बाइक, ऑटो, ई-रिक्शा, ट्रैक्टर, साइकिल और अन्य धीमी गति वाले वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित।
प्रशासन का कहना है कि एक्सप्रेसवे के संचालन के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना उत्तर प्रदेश के सड़क नेटवर्क को नई मजबूती देने के साथ-साथ प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति प्रदान करेगी।
तेज रफ्तार का सपना, लेकिन गरीबों के हिस्से क्या आया?
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को प्रदेश के विकास की बड़ी परियोजना के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे यात्रा का समय घटेगा, उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और व्यापार आसान होगा। लेकिन दूसरी ओर सवाल यह भी उठ रहे हैं कि इस विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुंचेगा या नहीं।
एक्सप्रेसवे पर बाइक, ऑटो, ई-रिक्शा, ट्रैक्टर और अन्य धीमी गति वाले वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। ऐसे में रोजाना इन्हीं साधनों से सफर करने वाले निम्न आय वर्ग के लोगों को इस सड़क का सीधा लाभ नहीं मिल पाएगा। उन्हें पहले की तरह पुराने मार्गों का ही उपयोग करना होगा, जहां ट्रैफिक जाम और अधिक समय की समस्या बनी रह सकती है।
आलोचकों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी इस परियोजना का सबसे अधिक फायदा निजी वाहन और भारी व्यावसायिक परिवहन को मिलेगा, जबकि आम और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को इसका लाभ सीमित रहेगा। साथ ही टोल शुल्क भी निजी वाहन चालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल सकता है।
हालांकि सरकार का कहना है कि एक्सप्रेसवे से पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रैफिक कम होगा, जिससे सभी यात्रियों को अप्रत्यक्ष रूप से राहत मिलेगी। ऐसे में इस परियोजना के वास्तविक सामाजिक और आर्थिक प्रभाव का आकलन आने वाले समय में ही स्पष्ट हो सकेगा।
