• October 5, 2026
  • Last Update August 31, 2026 1:57 am
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बरेली कॉलेज

189 वर्षों की गौरवगाथा का साक्षी बरेली कॉलेज: शिक्षा, संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को संजोए मनाएगा स्थापना दिवस

बरेली। रुहेलखंड की शैक्षिक पहचान और उत्तर प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल बरेली कॉलेज एक बार फिर अपने गौरवशाली इतिहास को याद करने की तैयारी में है। हर वर्ष की तरह इस बार भी 17 जुलाई को महाविद्यालय में स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया जाएगा। हालांकि बरेली कॉलेज की स्थापना दिसंबर 1837 में एक सरकारी विद्यालय के रूप में हुई थी, लेकिन वर्तमान ऐतिहासिक भवन में 17 जुलाई 1906 को प्रवेश और उद्घाटन के बाद से महाविद्यालय इसी तिथि को अपना स्थापना दिवस मनाता आ रहा है। यह परंपरा आज भी उसी सम्मान और गौरव के साथ निभाई जा रही है।

संघर्षों के बीच बनी देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में पहचान

करीब 189 वर्षों का सफर तय कर चुका बरेली कॉलेज केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और सामाजिक चेतना का जीवंत केंद्र रहा है। 1837 में इसकी शुरुआत नौमहला मस्जिद के पास एक सरकारी स्कूल के रूप में हुई थी। बाद में इसे कॉलेज का स्वरूप मिला और उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन गया। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महाविद्यालय भी उस उथल-पुथल का साक्षी बना। क्रांति के कारण शिक्षण कार्य प्रभावित हुआ, लेकिन परिस्थितियां सामान्य होने के बाद संस्थान ने फिर से शिक्षा का दीप जलाया और लगातार आगे बढ़ता रहा।

रामपुर के नवाब के सहयोग से मिला वर्तमान परिसर

महाविद्यालय के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय 17 जुलाई 1906 को जुड़ा, जब रामपुर के नवाब द्वारा उपलब्ध कराई गई भूमि पर बने वर्तमान भव्य भवन का उद्घाटन हुआ। इसके बाद से बरेली कॉलेज की पहचान इसी ऐतिहासिक परिसर से जुड़ गई। विशाल लाल भवन, घंटाघर, सभागार, हरियाली और विस्तृत परिसर आज भी इसकी ऐतिहासिक विरासत की गवाही देते हैं। यही कारण है कि महाविद्यालय प्रत्येक वर्ष 17 जुलाई को अपना स्थापना दिवस मनाता है।

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ज्ञान, साहित्य और समाज निर्माण का केंद्र

बरेली कॉलेज ने पिछले लगभग दो शताब्दियों में लाखों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की है। यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले अनेक छात्र प्रशासनिक सेवाओं, न्यायपालिका, शिक्षा, चिकित्सा, साहित्य, पत्रकारिता, राजनीति और सामाजिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में देश और समाज का नेतृत्व कर चुके हैं। महाविद्यालय ने हमेशा केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी, राष्ट्र सेवा और नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी दी है।

नई शिक्षा नीति के साथ बदल रहा महाविद्यालय

समय के साथ बरेली कॉलेज भी आधुनिक शिक्षा की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप पाठ्यक्रमों का संचालन, डिजिटल शिक्षा, शोध गतिविधियों को बढ़ावा, पुस्तकालयों का आधुनिकीकरण तथा विद्यार्थियों के कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। महाविद्यालय प्रशासन परिसर के आधुनिकीकरण, शोध संस्कृति को मजबूत करने और राष्ट्रीय स्तर पर संस्थान की पहचान को और सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है।

स्थापना दिवस पर होंगे विविध कार्यक्रम

स्थापना दिवस के अवसर पर महाविद्यालय परिसर में पौधरोपण, शहीद स्तंभ पर मोमबत्ती जलाकर शहीदों को नमन के साथ महापुरूषों की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी।

रुहेलखंड की शैक्षिक धरोहर

आज भी बरेली कॉलेज केवल एक महाविद्यालय नहीं, बल्कि रुहेलखंड की बौद्धिक चेतना, ऐतिहासिक विरासत और शैक्षिक उत्कृष्टता का प्रतीक माना जाता है। बदलते दौर में चुनौतियां भले ही नई हों, लेकिन लगभग 189 वर्षों की इसकी गौरवशाली यात्रा यह संदेश देती है कि शिक्षा की मजबूत नींव पर खड़ी संस्थाएं समय के हर दौर में समाज का मार्गदर्शन करती रहती हैं। यही विरासत बरेली कॉलेज को प्रदेश ही नहीं, देश के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शिक्षण संस्थानों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा करती है।

बरेली कॉलेज के स्वाभिमान पर उठते रहे सवाल

शिक्षाविदों, पूर्व छात्रों और शहर के बुद्धिजीवियों का मानना है कि रुहेलखंड विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद बरेली कॉलेज की प्रशासनिक और शैक्षणिक पहचान पहले जैसी नहीं रह गई। एक समय उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र और क्षेत्र के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में गिने जाने वाला बरेली कॉलेज, विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद एक संबद्ध महाविद्यालय के रूप में सीमित होकर रह गया। इससे उसकी स्वतंत्र शैक्षणिक पहचान और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हुई।

वर्षों से पूर्व छात्र और शिक्षा जगत से जुड़े लोग यह मांग उठाते रहे हैं कि अपने लगभग दो शताब्दियों के गौरवशाली इतिहास, शैक्षणिक योगदान और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए बरेली कॉलेज को पुनः उसकी विशिष्ट पहचान दिलाई जाए। उनका कहना है कि जिस संस्थान ने पूरे रुहेलखंड में उच्च शिक्षा की नींव रखी, उसी की गरिमा समय के साथ धूमिल होती चली गई।

हालांकि दूसरी ओर यह भी तर्क दिया जाता है कि विश्वविद्यालय की स्थापना से पूरे क्षेत्र में उच्च शिक्षा का विस्तार हुआ और अनेक नए महाविद्यालयों को इसका लाभ मिला। इसके बावजूद बरेली कॉलेज की ऐतिहासिक विरासत और उसके स्वाभिमान को संरक्षित रखने की मांग आज भी समय-समय पर उठती रहती है।

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