मां… कहां हो तुम, ठेले के नीचे रोता मिला मासूम

मां… कहां हो तुम, ठेले के नीचे रोता मिला मासूम

बरेली। रात के करीब एक बजे थे, पूरा शहर लगभग सो गया था। शहर की सड़के लगभग शांत हो चुकी थी। कुछ मुसाफिर सैटेलाइट बस स्टैंड पर अपनी मंजिल की तलाश में इधर उधर भटक रहे थे। किसी को कहीं दूर अपने घर जाने की जल्दी थी तो कोई कहीं दूर से अपने घर आया था। सभी को जल्दी थी तो बस अपनी मंजिल या घर जाने की। इस भागदौड़ के बीच एक नन्ना सा मासूम रो-रोकर अपनी मां को बुला रहा था।

मां… मां… मां… बच्चे के इस रोने की आवाज को उसकी मां ने तो नहीं सुना लेकिन वहां मौजूद सभी मुसाफिरों के दिल को यह आवाज दहला रही थी। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर यह आवाज आ कहां से रही है। तभी अचानक से एक व्यक्ति को बस स्टैंड के पास खड़े एक ठेले के नीचे एक डेढ़ माह का मासूम शिशु दिखाई दिया। आदमी ने दौड़ कर बच्चे को अपने गले से लगा लिया। बच्चा लगातार रो रहा था और आसपास मौजूद लोग उसकी हालत देखकर भावुक हो रहे थे।

आसपास मौजूद लोगों ने इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी। सूचना मिलते ही थाना बारादरी पुलिस मौके पर पहुंच गई। पहले तो पुलिस ने बच्चे की मां को ढूंढने का प्रयास किया असफल होने पर पुलिस ने चाइल्ड हेल्प लाइन 1098 की टीम को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही चाइल्ड हेल्प लाइन मौके पर पहुंची और बिना समय गंवाए बच्चे को सुरक्षित रेस्क्यू कर उसकी जिंदगी बचा ली।

घटना मंगलवार देर रात करीब 1:30 बजे की बताई जा रही है। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने सबसे पहले बच्चे को सुरक्षित संरक्षण में लिया और उसकी हालत का निरीक्षण कराया। इसके बाद नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया शुरू करते हुए शिशु को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। पुलिस के अनुसार प्रथम दृष्टया बच्चे के माता-पिता अथवा परिजनों के संबंध में कोई जानकारी नहीं मिल सकी।

संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई बनी मासूम के लिए जीवनदान

थाना बारादरी पुलिस और चाइल्ड हेल्प लाइन की तत्परता इस पूरे घटनाक्रम में सराहनीय रही। यदि समय रहते बच्चे को सुरक्षित नहीं निकाला जाता, तो उसके जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा सकता था। टीम ने बिना किसी देरी के बच्चे को आवश्यक संरक्षण प्रदान किया और उसके अधिकारों की रक्षा के लिए सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया।

रेस्क्यू के बाद बच्चे को चाइल्ड हेल्प लाइन की टीम ने न्यायपीठ, बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी), बरेली के समक्ष प्रस्तुत किया। समिति द्वारा आवश्यक आदेश जारी किए जाने के बाद मासूम को सुरक्षित देखभाल और पालन-पोषण के लिए राजकीय दत्तक ग्रहण इकाई में प्रवेश दिलाया गया। फिलहाल बच्चे की देखभाल विशेषज्ञों की निगरानी में की जा रही है और उसका स्वास्थ्य भी सामान्य बताया जा रहा है।

अब सबसे बड़ी चुनौतीमासूम को उसके परिवार तक पहुंचाना

हालांकि बच्चे की जान बचा ली गई है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह मासूम यहां तक कैसे पहुंचा और उसके माता-पिता या परिजन कौन हैं। पुलिस और चाइल्ड हेल्प लाइन दोनों इस दिशा में जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहे हैं।

चाइल्ड हेल्प लाइन बरेली ने आमजन से भावनात्मक अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को इस बच्चे के माता-पिता, परिजनों या उसकी गुमशुदगी के संबंध में किसी भी प्रकार की जानकारी हो, तो तत्काल चाइल्ड हेल्प लाइन 1098 अथवा थाना बारादरी, बरेली को सूचित करें। आपकी एक छोटी-सी सूचना इस मासूम को उसके परिवार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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हर नागरिक की जिम्मेदारी है बच्चों की सुरक्षा

चाइल्ड हेल्प लाइन ने लोगों से यह भी अनुरोध किया है कि यदि कहीं कोई बच्चा असहाय, लावारिस, संकटग्रस्त या असुरक्षित स्थिति में दिखाई दे तो उसे अनदेखा न करें। तुरंत 1098 पर सूचना दें। आपकी सतर्कता किसी मासूम की जिंदगी बचा सकती है और उसे सुरक्षित भविष्य दे सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि समाज में बच्चों की सुरक्षा केवल सरकारी संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी नैतिक दायित्व है। समय पर दी गई सूचना कई बार किसी बच्चे को दुर्घटना, मानव तस्करी या अन्य गंभीर खतरों से बचा सकती है।

मानवता की मिसाल बनी यह कार्रवाई

बरेली में हुई यह घटना केवल एक रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं, बल्कि मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण भी है। आधी रात में मिले एक असहाय मासूम को नई जिंदगी देने में पुलिस और चाइल्ड हेल्प लाइन की तत्परता ने यह साबित कर दिया कि समय पर उठाया गया एक कदम किसी की पूरी जिंदगी बदल सकता है। फिलहाल यह मासूम सुरक्षित हाथों में है, लेकिन उसकी आंखें अब भी अपने अपनों की तलाश कर रही हैं। उम्मीद है कि जनता के सहयोग और प्रशासन की सक्रियता से जल्द ही इस बच्चे के परिवार का पता चल सकेगा और उसकी पहचान सामने आएगी।

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