बरेली। शाही थाना क्षेत्र अंतर्गत तुरसा गांव में शनिवार शाम दर्दनाक हादसा हो गया। अचानक घर का छज्जा गिरने से 70 वर्षीय महिला नत्थो देवी और उनकी छह वर्षीय नातिन दीपांजलि की मलबे में दबकर मौत हो गई। इस घटना के बाद से परिवार में कोहराम मच गया।
मृतक के पुत्र आनंदस्वरुप ने बताया कि वे अपने भाई यशपाल और विजय पाल के परिवार के साथ एक ही घर में रहते हैं, जहां मां नत्थो देवी भी रहती थीं। घर का एक हिस्सा कच्ची छत का था, जो कुछ समय पहले गिर गया था, लेकिन दीवार के सहारे छज्जा बचा हुआ था। शनिवार शाम करीब छह बजे नत्थो देवी अपनी छह वर्षीय नातिन दीपांजलि और दस वर्षीय पोते संदेश के साथ चारपाई पर बैठी थीं। अचानक छज्जा भरभराकर नीचे गिर गया। मलबा गिरने से नत्थो देवी व नातिन दीपांजलि गंभीर रूप से घायल हो गई थी।
नत्थो देवी और दीपांजलि के मलबे की जानकारी मिलते ही पूरे घर में चीख-पुकार मच गई। शोर सुनकर परिजन और आसपास के लोग एकत्र हो गए और मलबा हटाने लगे। तुरंत ही घायलों को नजदीक के अस्पताल ले गए। गंभीर हालत देखते हुए दोनों को बरेली रेफर कर दिया गया जहां चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
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बाल–बाल बचा पोता
जानकारी के अनुसार दादी नत्थो देवी के पास उनका पोता संदेश भी बैठा हुआ था। संदेश पढ़ाई के लिए पेंसिल लेने चारपाई से उठकर चला गया। तभी नत्थो देवी और दीपांजलि के ऊपर छज्जा गिर गया। दोनों मलबे में दब गईं।
परिजनों की सूचना पर देर रात पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सीओ मीरगंज अजय कुमार ने हादसे की पुष्टि की है।
आर्थिक तंगी से जूझ रहा था परिवार
यशपाल के चचेरे भाई जगदीश प्रसाद ने बताया कि तीनों भाइयों के पास कुल नौ बीघा जमीन है। परिवार का भरण-पोषण मजदूरी करके होता है। पूरा परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। इसी करण वह अपने घर का निर्माण नहीं करा पाए थे।
सरकारी सहायता के इंतजार में था परिवार
पंचायत सचिव अंजली ने बताया कि नत्थो देवी का आवास के लिए आवेदन लंबित था। दीपांजलि की मां सुनीता देवी का नाम स्वीकृत आवासों की सूची में शामिल है। छह वर्षीय दीपांजलि कक्षा एक की छात्रा थी। यह परिवार सरकारी सहायता का इंतजार कर रहा था।
